क्या डायबिटीज के लिए योग अच्छा है: जानिए डायबिटीज के लिए 5 सबसे अच्छे योगासन

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डॉ पाखी शर्मा, एमबीबीएसजनरल फिजिशियन, 6+ वर्ष के अनुभव के साथ
Published On : 22-Sep-2022Read Time : 10 minutes
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आज के वक्त में योग कई तरह की बीमारियों से बचाव व उनके इलाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या डायबिटीज के लिए योग फायदेमंद है? अगर हां, तो कौन सा योगासन मधुमेह में ज्यादा उपयोगी है? 


बता दें योग एक तरह से मन और शरीर का सम्पूर्ण अभ्यास है। यह अभ्यास डायबिटीज में कैसे लाभकारी हो सकता है, आपको इन सभी सवालों के जवाब इस लेख से मिल जाएंगे।


विषय सूची:

  • डायबिटीज क्या है? 
  • डायबिटिक्स के लिए योगासन: क्या ये फायदेमंद है? 
  • डायबिटीज के लिए 5 सबसे अच्छे योगासन चित्रों के साथ 
  • डायबिटिक्स के लिए योग करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है? 
  • डायबिटिक्स को किन आसनों से बचना चाहिए? 
  • सारांश पढ़ें 
  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज एक क्रॉनिक कंडीशन है, जिसमें आपका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है। यह तब होता है जब आपका शरीर इन्सुलिन उत्पादन करने में असमर्थ होता है (टाइप 1 डायबिटीज) या इंसुलिन का कुशलतापूर्वक उपयोग नहीं कर पाता है।


जब डायबिटीज में ये दोनों ही स्थितियां उत्पन्न हो जाती है, तब टाइप 2 डायबिटीज की समस्या पैदा होती है। बता दें कि इंसुलिन पैंक्रियाज से रिलीज़ होने वाला एक प्रकार का हार्मोन है और इसका काम आपके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना है।


हालांकि, डायबिटीज को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन स्वस्थ आहार, जीवनशैली में बदलाव और नियमित शारीरिक एक्टिविटीज़ के साथ इसे प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है।

डायबिटिक्स के लिए योगासन: क्या ये फायदेमंद है?

यदि आप लो इम्पैक्ट फिजिकल एक्टिविटीज़ करना चाहते हैं, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रख सके, तो योग आपकी पहली पसंद होना चाहिए। इसके लिए विभिन्न आसन होते हैं, जिनमें सांस लेने की तकनीक के साथ-साथ बॉडी मूवमेंट्स को सिंक्रोनाइज़ करना शामिल है।


मधुमेह व्यायाम या योग आसन आपकी मांसपेशियों को आराम देने, ब्लड सर्कुलेशन और अंगों के कार्यों में सुधार करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से मधुमेह के लिए योग करने से आपके पैंक्रियाज के कार्य और इंसुलिन के स्राव में सुधार हो सकता है। योग इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार कर सकता है। ये आपके  सेल्स को अधिक ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद कर सकता है, ताकि ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहे।


मधुमेह में शरीर के वजन में काफी परिवर्तन होने लगता है। ये डायबिटीज के लक्षणों में से एक है। ऐसे में हेल्दी बॉडी वेट को बनाए रखने के लिए मधुमेह के लिए योग एक प्रभावी तरीका है। मोटापा या ओवरवेट होना टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारकों में से एक है। अतः इन जोखिम कारकों से बचने के लिए मधुमेह के लिए योग (diabetes ke liye yoga) जरूरी है। 


नियमित तौर पर शुगर के लिए योगासन अभ्यास, डायबिटीज की अन्य जटिलताओं जैसे- नर्व डैमेज, किडनी की बीमारियों और हृदय रोगों के जोखिम को कम कर सकता है।

डायबिटीज के लिए 5 बेस्ट योगासन चित्रों के साथ

यहाँ डायबिटीज के लिए 5 बेस्ट योग आसन बताए गए हैं, साथ में इन योगासनों के करने के तरीके भी दिए गए हैं:


1. वृक्षासन या ट्री-पोज़ (Tree-Pose)



यह आसन एक खड़े हुए पेड़ जैसा होता है। वृक्षासन आपके पैरों की मांसपेशियों, टेंडन्स और लिगामेंट्स (मांसपेशियों से मांसपेशियों को और हड्डियों से हड्डियों को जोड़ने वाले ऊत्तक) को मजबूत करने में मदद कर सकता है। जैसे कि डायबिटीज के मरीजों को कई बार मांसपेशियों व हड्डियों में दर्द की शिकायत होती है। ऐसे में यह योगासन उनके लिए लाभकारी हो सकता है।


बता दें कि यह एक प्रकार का ध्यान योग है। इसे करने से तनाव भी कम हो सकता है। यह पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज़ में मदद कर सकता है। अतः डॉक्टर भी डायबिटीज के मरीजों को वृक्षासन करने की सलाह दे सकते हैं।

 

वृक्षासन कैसे करें?

  • सबसे पहले समतल जमीन पर योग मैट या एक साफ चादर बिछा लें।
  • अब उस मैट या चादर पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने हाथों को अपने शरीर के दोनों ओर रखें। फिर धीरे-धीरे अपने बाएं यानी लेफ्ट पैर पर बैलेंस बनायें और दाहिने यानी राइट पैर को घुटने से मोड़ें। 
  • अब आप दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर के तलवे को बाएं जांघ पर रखें। ध्यान रहे कि आपके पैर का तलवा आपकी जहाँ से जांघ शुरू होती है (root of the thighs) वहां पर लगाएं।
  • ध्यान रहे इस दौरान आपका बायां पैर सीधा होना चाहिए। जब आप पूरी तरह बैलेंस बना लें, फिर गहरी सांस लें। अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर की तरफ उठायें और अपनी हथेलियों को एक साथ मिलाकर ‘नमस्ते’ की मुद्रा में आएं। 
  • सीधे देखें, अपनी रीढ़ को सीधा रखें और गहरी सांस लेते हुए 1 से 2 मिनट तक इसी स्थिति में बने रहें।
  • फिर धीरे-धीरे से साँस छोड़ते हुए, अपनी सामान्य स्थिति में वापस आ जाएँ।
  •  सामान्य मुद्रा में आने के बाद फिर इसी प्रोसेस को दोहराएं।
  • अपनी सुविधा अनुसार आप इस प्रक्रिया को दो से तीन या उससे ज्यादा बार भी कर सकते हैं।

सावधानी: 

  1. गर्भवती इस योग को न करें और अगर करना भी है तो इस बारे में एक बार डॉक्टर से सलाह लें।
  2. अगर किसी की हाल ही में सर्जरी हुई है तो वे इस योग को न करें।
  3. किसी को अगर रीढ़, कमर या पैरों से जुड़ी कोई समस्या है तो वे भी इस योग को न करें।


2. धनुरासन या धनुष-मुद्रा (Bow-Pose)



यह मधुमेह के लिए रामबाण आसन है, क्योंकि यह पैंक्रियाज को स्वस्थ बना सकता है। इस योग आसन का नाम धनुष मुद्रा (Bow-Pose) के नाम पर रखा गया है, क्योंकि इस आसन को करते समय व्यक्ति का शरीर धनुष के आकार जैसा दिखता है। इससे आपकी पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत हो सकती है।

 

धनुरासन कैसे करें?

  • इस योग को शुरू करने के लिए सबसे पहले एक प्लेन जमीन पर योग मैट या साफ चादर बिछा लें।
  • अब योग मैट या चादर पर पेट के बल लेट जाएं, लेटने के दौरान पैरों को सटाकर और सीधा रखें। हाथों को शरीर के बगल में पैरों की तरफ सीधा रखें। 
  • फिर अपने घुटनों को पीछे की तरफ मोड़ते हुए पीछे से कमर की ओर लाएं और फिर अपने हाथों को पीछे की ओर मोड़ें और अपनी एड़ियों (ankles) को अपने हाथों से पकड़ें। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और अपनी छाती, सिर और गर्दन को जमीन से ऊपर उठाएं।
  • इस दौरान अपने पैरों को ऊपर की तरफ पीठ की ओर खींचे। सीधे देखें और अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुद्रा को स्थिर रखें। आपका शरीर अब धनुष की तरह मुड़ा हुआ दिखाई देगा। 
  • इस दौरान अपने शरीर को उतना ही उठाएं जितना आपका शरीर सह सके। लंबी सांस लें और 15 से 20 सेकेंड के बाद सांस छोड़ें।
  • एक मिनट के लिए इस स्थिति में रहें और फिर धीरे-धीरे अपने पैरों और छाती को जमीन पर लाएं। अपने हाथों को छोड़ दें और एड़ियों को आराम की मुद्रा में आने दें। आप इस पोज़ को 3 से 4 बार दोहरा सकते हैं।

सावधानी:

  • गर्भवती इस योग को बिल्कुल न करें।
  • पेट या कमर से जुड़ी कोई समस्या रही हो या सर्जरी हुई है तो इस योग को न करने की सलाह दी जाती है।
  • जितनी क्षमता हो उतना ही अपने शरीर को ऊपर की ओर उठाएं या स्ट्रेच करें।

3. पश्चिमोत्तानासन (Seated-Forward Bend)


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पश्चिमोत्तासन आपकी पीठ के निचले हिस्से, हैमस्ट्रिंग और कूल्हों को स्ट्रेच करता है। यह आपके पैल्विक अंगों को टोन करने में भी मदद कर सकता है। यह योग शरीर से एक्स्ट्रा फैट कम करने के साथ-साथ  डायबिटीज की जटिलताओं को कम करने में भी मदद कर सकता है। बता दें मधुमेह के मरीजों में वजन बढ़ने का जोखिम अधिक होता है। ऐसे में डायबिटीज के लिए यह योग आसन काफी फायदेमंद हो सकता है। 

 

पश्चिमोत्तासन कैसे करें?

  • अन्य योगासनों की तरह ही इसे भी करने से पहले समतल जमीन पर चादर या योग मैट बिछा लें।
  • अब योग मैट या चादर पर सीधे बैठ जाएं और अपने पैरों को अपने सामने लंबा फैलाएं। अपनी रीढ़ को सीधा और पैर की उंगलियों को भी सीधा रखें। सांस अंदर लें और दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं और स्ट्रेच करें।
  • सांस छोड़ें और अपने कमर को मोड़ते हुए सामने की तरफ झुकें और अपनी ठुड्डी को अपने पंजों की ओर ले जाने का प्रयास करें। 
  • अपने हाथों को अपने पैरों की ओर बढ़ाएं और अपने पैर की उंगलियों को अपने हाथों से पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रखें बहुत ज्यादा मेहनत न करें और जितना आराम से हो सके उतना ही झुकें।
  • कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और गहरी सांस लेते रहें। फिर, धीरे-धीरे अपने सिर को ऊपर उठाएं और अपने पैरों को फैलाकर शुरूआती स्थिति में वापस आ जाएं। आप इस प्रक्रिया को 2 से 3 बार दोहरा सकते हैं।

सावधानी:

  • प्रेग्नेंट महिलाएं इस योग को न करें।
  • किसी तरह की सर्जरी हुई हो तो इस आसान को न करें।

4. फलकासन (Plank-Pose)


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यह योगासन मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ आपकी गर्दन और पीठ को भी मजबूत करने का काम कर सकता है। फालकासन आपके रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है, तनाव को कम कर सकता है, डाइजेशन में सहायक हो सकता है और यह आपके पोस्चर को भी सही कर सकता है।

 

फलाकासन कैसे करें?

  • सबसे पहले समतल जमीन पर योग मैट या चादर बिछा लें। अब उस पर सीधे खड़े हो जाएँ।
  • फिर पेट के बल लेट जाएँ, अब अपनी हथेलियों को फर्श पर फ्लैट रखें। अपनी उंगलियों को फैलाएं और अपने हाथों को सीधा रखें। फिर पुश-अप पोजीशन में आएं। 
  • अपनी बाहों से अपनी हथेलियों पर दबाव बनायें, अपनी रीढ़ को सीधा रखें और अपनी ठुड्डी को थोड़ा सा पुश करें जैसे आप फर्श की ओर देख रहे हों। 
  • इस दौरान अपने पैर, कूल्हे और धड़ वाला भाग एक सीधी रेखा में रखें। अपने पैर की उंगलियों के साथ, अपने सिर को आगे की ओर पुश करें। 
  • अब अपने शरीर को अपने हथेलियों के बल पर जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करें, जैसे कि पुश-अप के दौरान करते हैं। इस पोजीशन में 40 से 60 सेकेंड तक रहें और गहरी सांस लेते रहें।
  • शुरूआती स्थिति में आने के लिए अपने घुटनों को मोड़ें और चाइल्ड पोज़ (child pose) में आ जाएं या अपनी कोहनियों को मोड़कर नीचे करें। आप अपनी शुरुआती स्थिति में वापस आने के लिए कोई भी तरीका चुन सकते हैं। आप इस आसन को 5 से 7 बार दोहरा सकते हैं।

सावधानी:

  • गर्भवती और सर्जरी करा चुके व्यक्ति इस आसन को न करें।

5. विपरीत करणी (Legs-up-the-wall Pose)


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यह आपको रिलैक्स करने वाला और मन को शांत करने वाला आसन है, जो आपके ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद कर सकता है। इस योग आसन निचले हिस्सों में सूजन के रिस्क को भी कम कर सकता है। इतना ही नहीं यह हार्मोनल संतुलन और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है।

 

विपरीत करणी आसन कैसे करें?

  • इस योग आसन को करने के लिए सबसे पहले दीवार के पास जमीन पर चादर या योग मैट बिछाएं।अब आप जमीन पर बिछाए गए योग मैट या चादर पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को दीवार के सहारे सीधे 90 डिग्री के एंगल में ऊपर उठाएं और शरीर को वर्टिकल रखें।
  • आप बिना दीवार के सहारे भी यह कर सकते हैं, लेकिन पहले प्रैक्टिस की आवश्यकता है। इस दौरान आप अपने हाथों को अपने पेट पर या अपने धड़ के बगल में फर्श पर आराम से रखें। आप अपनी आंखें बंद कर गहरी सांस ले सकते हैं। 
  • ध्यान रहे इस दौरान आपकी पीठ और सिर जमीन पर आराम से रहे, कुछ मिनट के लिए इस स्थिति में रहें। अपने सिर और पीठ को फर्श पर टिकाएं, ताकि किसी प्रकार की चोट या मोंच न आए। शुरुआत की स्थिति में आने के लिए, अपने घुटनों को धीरे से मोड़ें और अपने शरीर को दीवार से दूर करते हुए बैठने की स्थिति में आ जाएँ।

सावधानी:

  • प्रेग्नेंट महिलाएं, पीठ, गर्दन या कमर दर्द से पीड़ित या किसी तरह की हड्डियों से संबंधित समस्या वाले लोग इस योगासन को न करें।

डायबिटिक्स के लिए योग करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

शुगर के लिए योगासन (sugar ke liye yoga) करना बहुत जरूरी है। उतना ही मायने रखता है  डायबिटीज के लिए योग करने का समय। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए सुबह जल्दी योग करने की सलाह दी जाती है। सुबह-सुबह खाली पेट सांस लेने वाले योगासन करने से, डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

डायबिटिक्स को किन आसनों से बचना चाहिए?

यह सच है कि डायबिटीज के मैनेजमेंट के लिए योग करने की अत्यधिक सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ ऐसे पोज़ या आसन भी हैं जिनसे मधुमेह रोगियों को बचना चाहिए, जैसे कि :

  • शीर्षासन: यह एक ऐसा आसन है, जो आपके सिर में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। इससे आपके सिर में खून का प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे आपकी आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है। इसलिए डायबिटीज में इनवर्जन पोज से बचना बेहतर है।
  • चक्रासन: चक्रासन या पहिया मुद्रा बहुत फुर्तीला पोज़ है, जो आपकी हृदय गति को बढ़ा सकता है। डायबिटीज रोगियों में, हृदय गति बढ़ने से हृदय से जुड़ी समस्याएँ या स्ट्रोक जैसी जटिलताओं का रिस्क बढ़ सकता है। अतः यदि आपको डायबिटीज है, तो आपको चक्रासन से बचना चाहिए।
  • पिंच मयूरासन: पिंच मयूरासन या मोर के पंख जैसी मुद्रा वाला यह भी इनवर्टेड आसन है, जिससे मधुमेह रोगियों को बचना चाहिए। यह आपके सिर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा सकता है और छोटी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंचा सकता है, विशेष रूप से आपकी आंखों को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।

इस लेख में हमने जाना कि डायबिटीज के लिए योग बहुत लाभदायक है। साथ ही हमने यह भी जाना कि  कौन से योगों को डायबिटीज रोगी को नहीं करने की सलाह दी जाती है। डायबिटीज होने पर दवाई के साथ-साथ सही जीवनशैली अपनाना और मधुमेह व्यायाम करना जरूरी होता है, क्योंकि उचित योगासन आपके बढ़ते शुगर लेवल  को आसानी से कम कर सकता है। 


सारांश पढ़ें

  • योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है । इसमें विभिन्न आसन शामिल हैं, जो एक विशिष्ट शरीर पोस्चर या पोज़ को रेफर करते हैं। 
  • इन आसनों के नियमित अभ्यास से आपका इम्यून सिस्टम मजबूत हो सकता है और डायबिटीज जैसी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों को रोकने और मैनेज करने में मदद मिल सकती है। बता दें कि डायबिटीज में व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यून पावर प्रभावित हो सकती है।
  • डायबिटीज के लिए योग आपकी मांसपेशियों को रिलैक्स कर सकते हैं, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार कर सकते हैं और आपके अंगों के फंक्शन्स को बेहतर कर सकते हैं। नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से आपके पैंक्रियाज के फंक्शन और इंसुलिन स्राव में सुधार हो सकता है। योग इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार कर सकता है और आपके  सेल्स को अधिक ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद कर सकता है, ताकि आपका ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहे।
  • स्वस्थ शरीर के वजन को बनाए रखने के लिए योग एक प्रभावी तरीका है। मोटापा या ओवरवेट होना टाइप 2 मधुमेह के जोखिम कारकों में से एक है। अतः इन फैक्टर्स और मधुमेह के लिए योग बहुत फायदेमंद हो सकता है।
  • डाइबिटिक्स जिन आसनों का अभ्यास कर सकते हैं, उनमें वृक्षासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तानासन, फलकासन, और विपरीत करणी आसन शामिल हैं।
  • हालांकि, डायबिटीज के लिए योग फायदेमंद हैं, लेकिन कुछ ऐसे आसन भी हैं जिनसे आपको बचने की आवश्यकता है। इनमें शीर्षासन, चक्रासन और पिंच मयूरासन शामिल हैं। ये मुद्राएं डायबिटीज में जटिलताएं पैदा कर सकती हैं जैसे, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय से जुड़ी समस्याओं के रिस्क को बढ़ा सकती है।
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